Alakh ke amal par अलख के अमल पर Bhajan lyrics in hindi
अलख के अमल पर चढ़े योगीओ को
जणाये तरण सम जगत बादशाही
अलख के अमल पर.........
अमल कि वो यारों खुमारी ना उतरे
अंदर शहेनशाही को परवा ना कोई
अलख के अमल पर.........
हे तृष्णा भिखारी जो मिले शहेनशाही
न तुटे वहां तक कहां बादशाही
हे शाहों की शाही अदल फकिराइ
सर्व त्याग जिसने तृष्णा मिटाई
अलख के अमल पर.........
कदम पर हे जुगती खलक सारी आई
झुके राव राणा बेतुल बादशाही
जगत जहांगीरी है फिकर जिसने खाई
बना के मुकामों से आशा उठाई
अलख के अमल पर.........
इधर बादशाही उन्हें उधर बादशाही
मीटे खुफियारी इरे मुफलि शाही
न आना न जाना मिटी जंजीताई
फकिरी है ऐसी अदल शहेनशाही
अलख के अमल पर.........
सब है उसी में और वो हे सभी में
नजर एक बिन नहीं दूजे समाई
कहे लाल जिसने मस्ती को पाई
अमर तख्त पर गादी उसने बिसाइ
अलख के अमल पर.........
अलख के अमल पर चढ़े योगीओ को
जणाये तरण सम जगत बादशाही
अलख के अमल पर.........

बहुत सुंदर भजन धन्यवाद जी
ReplyDeleteWaah Maharaj Waah.....
ReplyDeleteJordaar bhajan chhe..... Bow samay thi aakhu bhajan gotato hato.. Thank you
ReplyDeleteअध्यात्मिक नशा,ऊंचे सोपान पर स्थिति ,बहुत सुंदर भजन, साधुवाद !!
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